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Chrome यूजर्स अलर्ट: 108 खतरनाक एक्सटेंशन का खुलासा, Google और Telegram अकाउंट पर मंडरा रहा खतरा

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Google Chrome के 100 से ज्यादा एक्सटेंशन में खतरनाक कोड मिलने का खुलासा हुआ है, जो यूजर्स का डेटा चोरी कर रहे हैं और उनके अकाउंट तक हैकर्स की पहुंच बना रहे हैं।

DESK:अगर आप Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सैकड़ों नहीं, बल्कि सौ से अधिक ऐसे एक्सटेंशन मौजूद हैं, जो दिखने में सामान्य टूल्स जैसे लगते हैं लेकिन अंदर ही अंदर यूजर्स का निजी डेटा चुरा रहे हैं। यह मामला केवल सामान्य जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अकाउंट हैकिंग और सेशन कंट्रोल जैसी गंभीर गतिविधियां भी शामिल हैं।

साइबर सुरक्षा फर्म Socket की जांच में सामने आया है कि करीब 108 एक्सटेंशन लंबे समय से यूजर्स को निशाना बना रहे थे। ये एक्सटेंशन अक्सर ऐसे फीचर्स का दावा करते हैं, जिनकी जरूरत रोजमर्रा के इस्तेमाल में पड़ती है, जैसे ट्रांसलेशन, सोशल मीडिया टूल्स या मैसेजिंग ऐप्स का सपोर्ट। यही वजह है कि यूजर्स बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए इन्हें इंस्टॉल कर लेते हैं।

इन एक्सटेंशन की सबसे खतरनाक बात यह है कि ये बैकग्राउंड में छिपकर काम करते हैं। यूजर को इसका कोई संकेत नहीं मिलता, जबकि उनके ब्राउजर से संवेदनशील जानकारी लगातार बाहर भेजी जाती रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी एक्सटेंशन का कंट्रोल एक ही कमांड-एंड-कंट्रोल सर्वर से जुड़ा हुआ पाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसके पीछे एक संगठित साइबर नेटवर्क सक्रिय है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इन एक्सटेंशन के जरिए यूजर्स के Google Account तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी। जैसे ही कोई यूजर अपने अकाउंट से लॉगिन करता है, यह एक्सटेंशन OAuth2 जैसे सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए उसकी प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी जैसे ईमेल आईडी और अन्य विवरण हासिल कर लेते हैं। यह जानकारी सीधे हैकर्स के सर्वर तक पहुंच जाती है, जिससे यूजर की पहचान और डेटा दोनों खतरे में पड़ जाते हैं।

मामले का एक और चिंताजनक पहलू Telegram यूजर्स से जुड़ा है। कुछ एक्सटेंशन खासतौर पर Telegram अकाउंट को टारगेट कर रहे थे। इनका तरीका बेहद चालाक है—ये यूजर्स के एक्टिव लॉगिन टोकन को चुरा लेते हैं और उसे नियमित अंतराल पर हैकर्स तक भेजते रहते हैं। इसका मतलब यह है कि बिना पासवर्ड या OTP के भी कोई आपके अकाउंट को एक्सेस कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ एक्सटेंशन में बैकडोर भी पाया गया है, जो ब्राउजर को अपने आप संदिग्ध वेबसाइट खोलने के लिए मजबूर कर सकता है। इससे फिशिंग अटैक, मैलवेयर इंस्टॉल और डेटा चोरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यानी यूजर केवल एक एक्सटेंशन इंस्टॉल करके अनजाने में अपने पूरे सिस्टम को खतरे में डाल सकता है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन खतरनाक एक्सटेंशन को हजारों बार डाउनलोड किया जा चुका है। अनुमान है कि करीब 20,000 से ज्यादा यूजर्स पहले ही इसके शिकार बन चुके हैं। चूंकि ये एक्सटेंशन सामान्य दिखते हैं, इसलिए अधिकांश यूजर्स को यह पता ही नहीं चलता कि उनका डेटा चोरी हो रहा है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में ब्राउजर एक्सटेंशन सुविधा के साथ-साथ एक बड़ा जोखिम भी बनते जा रहे हैं। पहले जहां हैकर्स सीधे सिस्टम को निशाना बनाते थे, वहीं अब वे छोटे-छोटे टूल्स के जरिए यूजर्स तक पहुंच बना रहे हैं, जिससे शक की संभावना भी कम हो जाती है।

ऐसी स्थिति में यूजर्स के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। सबसे पहले अपने ब्राउजर में इंस्टॉल सभी एक्सटेंशन की जांच करनी चाहिए और किसी भी अनजान या संदिग्ध एक्सटेंशन को तुरंत हटा देना चाहिए। इसके अलावा, अगर आपने हाल ही में किसी मैसेजिंग या सोशल मीडिया से जुड़ा एक्सटेंशन इंस्टॉल किया है, तो उससे जुड़े अकाउंट की सुरक्षा सेटिंग्स भी जरूर चेक करें।

सुरक्षा के लिहाज से यह भी जरूरी है कि यूजर्स अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स के पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सक्रिय रखें। इसके साथ ही, अनजान थर्ड-पार्टी ऐप्स को दिए गए एक्सेस को भी रिव्यू करना चाहिए और जरूरत न होने पर उन्हें हटा देना चाहिए।

कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि डिजिटल दुनिया में छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे में बदल सकती है। इसलिए किसी भी एक्सटेंशन को इंस्टॉल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी है। सतर्कता ही इस तरह के साइबर हमलों से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।

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